भाई साहब ये मिडिल क्लास लोग न किसको कुछ देके हेल्प करसकते हे और न ही हेल्प लेने की उम्मेदे रखते हे. ईमानदार होते हे मिडिल क्लास फॅमिली के लोग।
ये लोग बहत स्ट्रगल करते हे. और मिडिल क्लास फॅमिली के सारे जनरेशन की लोगों के अलग अलग पार्टेसनिया होती हे. फिर ये लोग अपनी दम पर आगे बढ़ते हे।
चालकों ठीक हे हम ऐसे फॅमिली से हे। दुःख न करो मेरी दोस्तों. हम व् आगे बढ़ेंगे,सबको साथ लेकर.
चलिए जानते हे कुछ जनरेशन की मिडिल क्लास होने के कारन कुछ सेरिओस्फुन्नी और कुछ सीरियस मूमेंट जानते हे।
छोटे छोटे चीजों केलिए तरसना.स्कूल तो एक ही होता हे ,फीस भी एक ही होता हे.लेकिन कुछ चीज ऐसा होता हे जो सबके साथ एक नहीं हो सकते थे. कुछ बचे डेली अलग अलग बैग ,पेंसिल लेके आते थे. बात तो बहत छोटी हे लेकिन हम भी बहत छोटे ही थे। कुछ समझ में नहीं आता था। ऐसा क्यों होता होता था ? फिर घरको जाके माँ बाबा के पास जिद करना। और बहत मुश्किल से बाबा लेके देते हे। हमको तो कुछ समझने में नहीं आता था।
फिर सारे दोस्त स्कूल बस में जाते थे। और हम डेली मां के साथ पैदल जा जा के थक चुके होते हे। बाबा के पास जिद सुरु करदेते हे। और कुछ दिन बस में जाने के बाद ख़तम हो जाता था। पता नहीं था क्यों होता था ऐसा।
और भी सारे जनरेशन की कुछ फनी और सीरियस सिचुएशन को पास से देखने केलिए इस पोस्ट को शेयर जरूर करे।
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